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आयकर रिटर्न (ITR-2) के लिए नया स्क्रिप्ट - हिंदी में

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आज हम बात करेंगे आयकर रिटर्न फॉर्म ITR-2 में हुए नए बदलावों के बारे में, जो केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने असेसमेंट ईयर 2026 के लिए अधिसूचित किए हैं। ये बदलाव 1 अप्रैल 2025 से लागू होंगे। तो चलिए, इन बदलावों को आसान भाषा में समझते हैं!


1. ऑनलाइन फाइलिंग और प्री-फिल्ड डेटा की सुविधा

आयकर विभाग ने ITR-2 की ऑनलाइन फाइलिंग को और आसान बना दिया है। अब आप ई-फाइलिंग पोर्टल पर प्री-फिल्ड डेटा के साथ ITR-2 फाइल कर सकते हैं। साथ ही, 11 जुलाई को ITR-2 के लिए एक्सेल यूटिलिटी भी जारी की गई है, जिससे आप आसानी से रिटर्न तैयार और फाइल कर सकते हैं। ये बदलाव करदाताओं के लिए टैक्स अनुपालन को और सरल और कुशल बनाते हैं।


2. शेयर बायबैक पर पूंजीगत नुकसान की रिपोर्टिंग

कंपनी द्वारा अपने शेयरों के बायबैक के लिए शेयरधारकों को किए गए भुगतान से होने वाले पूंजीगत नुकसान को अब शेड्यूल CG में एक नए कॉलम में दर्ज किया जा सकता है। यह प्रावधान कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 68 के तहत लागू है। लेकिन ध्यान दें, इस नुकसान की अनुमति तभी होगी, जब संबंधित डिविडेंड आय को ‘अन्य स्रोतों से आय’ के तहत घोषित किया जाए।


3. डिविडेंड आय की नई रिपोर्टिंग

ITR-2 में अब एक नया कॉलम जोड़ा गया है, जो धारा 2(22)(f) के तहत शेयर बायबैक से प्राप्त डिविडेंड आय को विशेष रूप से दर्ज करने के लिए है। यह सुनिश्चित करता है कि आपकी डिविडेंड आय सही तरीके से रिकॉर्ड हो।


4. रियल एस्टेट लेनदेन में लागत का बंटवारा

अब रेजिडेंट व्यक्तियों को ITR-2 में जमीन और भवन के हस्तांतरण के लिए अधिग्रहण लागत (cost of acquisition) और सुधार लागत (cost of improvement) को अलग-अलग बताना होगा। यह नियम 23 जुलाई 2024 को या उसके बाद किए गए लेनदेन के लिए लागू है। इससे इंडेक्सेशन लाभों का उपयोग आसान होगा।


5. संपत्ति और दायित्वों की रिपोर्टिंग में नया थ्रेशोल्ड

अब जिन करदाताओं की कुल आय 1 करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन तक की सभी संपत्तियों और दायित्वों की जानकारी देनी होगी। पहले यह सीमा 50 लाख रुपये थी। यह बदलाव पारदर्शिता को बढ़ाता है।


6. पूंजीगत लाभ की तारीख के आधार पर अलग-अलग कॉलम

फाइनेंस एक्ट 2024 के तहत 23 जुलाई 2024 से पूंजीगत लाभ की कर दरों में बदलाव किए गए हैं। इसके लिए ITR-2 में नए कॉलम जोड़े गए हैं, जो 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद के पूंजीगत लाभ को अलग-अलग दर्ज करने में मदद करेंगे। इससे पुरानी और नई कर दरों के आधार पर सही गणना सुनिश्चित होगी।


7. टीडीएस शेड्यूल में नया कॉलम

ITR-2 के टीडीएस शेड्यूल में एक नया कॉलम जोड़ा गया है, जिसमें करदाता को यह बताना होगा कि स्रोत पर काटा गया कर (TDS) किस धारा के तहत काटा गया है। यह सटीकता और अनुपालन को बढ़ाता है।


ITR-3 के बारे में भी जानें

ITR-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए है, जिनकी आय व्यवसाय या पेशे के लाभ और आय से आती है। इसमें भी पूंजीगत लाभ, कटौती, और संपत्ति-दायित्वों की नई थ्रेशोल्ड रिपोर्टिंग जैसे महत्वपूर्ण बदलाव शामिल किए गए हैं।


अंत में...
ये नए बदलाव करदाताओं के लिए टैक्स फाइलिंग को और पारदर्शी, आसान और कुशल बनाने के 

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