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 "क्या आपने होम लोन लिया है? क्या आप जानना चाहते हैं कि इसके ज़रिए आप अपनी इनकम टैक्स में कितनी और कैसे छूट पा सकते हैं?

तो ये वीडियो आपके लिए है — क्योंकि हम करने जा रहे हैं होम लोन और इनकम टैक्स बेनिफिट्स की पूरी पोस्टमॉर्टम!"

"होम लोन पर टैक्स छूट की पूरी जानकारी | ITR AY 2025-26"

🧑‍🏫 : होम लोन की बेसिक संरचना और टैक्स में क्या-क्या बेनिफिट मिलते हैं]

"सबसे पहले ये समझते हैं कि होम लोन में दो हिस्से होते हैं:

1. Interest (ब्याज)

2. Principal (मूलधन)

इन दोनों पर टैक्स कानून के तहत अलग-अलग सेक्शन में छूट मिलती है।"

 : ब्याज पर छूट – Section 24(b)]

💡 मुख्य बातें:

मकसद: अपने घर के लिए लिए गए लोन पर ब्याज भुगतान पर राहत

अधिकतम छूट: ₹2,00,000 तक प्रति वर्ष

कहां दिखाना है? ITR में "Income from House Property" हेड के अंतर्गत

📝 ध्यान दें:

यह छूट केवल स्व-स्वामित्व (Self-Occupied Property) के लिए है

अगर मकान किराए पर दिया गया है, तो पहले कोई लिमिट नहीं थी, लेकिन अब सेट-ऑफ लिमिट ₹2 लाख/वर्ष कर दी गई है

📌 शर्तें:

होम लोन बैंक/फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन से लिया गया हो

कंस्ट्रक्शन 5 साल के अंदर पूरा हुआ हो

घर का पजेशन मिल चुका हो

ब्याज का प्रमाण बैंक से लिया गया हो

📘  3: मूलधन (Principal) पर छूट – Section 80C]

💡 मुख्य बातें:

अधिकतम छूट: ₹1,50,000 तक

कहां दिखाना है? ITR के "Deduction under Chapter VI-A" में

📝 ध्यान दें:

यह छूट EMI में दिए गए प्रिंसिपल अमाउंट पर मिलती है

यह 80C की लिमिट में अन्य खर्च जैसे LIC, PPF, ELSS आदि के साथ मिलकर कुल ₹1.5 लाख में ही सीमित है

यदि मकान को 5 साल के अंदर बेचते हैं, तो यह छूट Reverse हो जाती है यानी अगले साल की इनकम में जोड़ा जाएगा

📘  4: एक्स्ट्रा बेनिफिट – Section 80EE और 80EEA]

Section 80EE (पुराना)

अधिकतम छूट: ₹50,000

केवल पहली बार घर खरीदने वालों के लिए

लोन 35 लाख से कम, प्रॉपर्टी 50 लाख से कम

लोन 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच लिया गया हो

Section 80EEA (वर्तमान)

अधिकतम छूट: ₹1,50,000 अतिरिक्त ब्याज पर

यह 24(b) के ₹2 लाख से अलग है

शर्तें:

पहली बार घर खरीद रहे हों

प्रॉपर्टी की स्टैम्प वैल्यू ₹45 लाख से कम हो

लोन 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 के बीच लिया गया हो

Section 80EE का लाभ नहीं लिया हो

📌 Note: ये दोनों सेक्शन अब नए लोन पर लागू नहीं होते, लेकिन पुराना लोन चालू है तो क्लेम कर सकते हैं।

📑  5: जॉइंट होम लोन पर टैक्स बेनिफिट]

"अगर आपने और आपके पार्टनर (पति/पत्नी या को-ऑनर) ने जॉइंट होम लोन लिया है, और दोनों EMI पे कर रहे हैं, तो दोनों को टैक्स छूट मिल सकती है — अलग-अलग:"

Interest (₹2 लाख प्रत्येक)

Principal (₹1.5 लाख प्रत्येक)

📝 शर्त:

दोनों मालिक होने चाहिए (co-owner)

दोno लोन में co-borrower हों

EMI में हिस्सा होना चाहिए

  6: जरूरी दस्तावेज़ – क्या रखें तैयार?]

📌 बैंक का होम लोन सर्टिफिकेट

📌 EMI ब्रेकअप जिसमें ब्याज और प्रिंसिपल अलग-अलग हो

📌 ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट या पजेशन लेटर

📌 रजिस्ट्री डीड / सेल डीड / अलॉटमेंट लेटर

📌 अगर 80EEA का दावा कर रहे हैं, तो प्रॉपर्टी की स्टांप वैल्यू डॉक्युमेंट

💻  7: ITR में कहां-कहां दिखाएं?]

👉 ITR-1:

सिर्फ ₹2 लाख तक का ब्याज क्लेम कर सकते हैं

Principal की एंट्री 'Chapter VI-A > 80C' में करें

किराए वाली प्रॉपर्टी पर ITR-1 से नहीं फाइल करें

👉 ITR-2 / ITR-3:

Income from House Property में ब्याज की डिटेल

Schedule VI-A में Principal की डिटेल

अगर दो घर हैं या किराए से इनकम है, तो ITR-2 या 3 चुनें

📣 : Bonus Tips]

✅ EMI रसीदें सालभर सुरक्षित रखें

✅ सभी क्लेम डॉक्युमेंट ITR फाइलिंग के समय अपलोड की आवश्यकता नहीं, लेकिन AO मांग सकता है

✅ Income from House Property में नेगेटिव इनकम (लॉस) को 'Other Income' से सेट किया जा सकता है (₹2 लाख तक)

✅ ब्याज केवल उसी साल क्लेम करें जिस साल पेमेंट हुआ हो

"तो दोस्तों, अगर आप होम लोन EMI भर रहे हैं, तो अपने टैक्स में इन छूटों का पूरा फायदा उठाएं।

एक छोटा-सा फॉर्म सही भरने से ₹3.5 लाख या उससे अधिक की टैक्स सेविंग हो सकती है!"

📩 अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी, तो Like करें, Subscribe करें और शेयर करें।

और यदि आपको अपने केस में प्रोफेशनल मदद चाहिए, तो हमसे संपर्क करें।

 ]: "हर EMI में है टैक्स छूट छिपी हुई, बस सही तरीके से उसे ITR में दिखाइए!"

 

म्यूच्यूल फंड टैक्सेशन पर वीडियो स्क्रिप्ट

परिचय

  • नमस्ते, आप देख रहे हैं taxगुरुजी digital । 
  • आज हम म्यूच्यूल फंड्स में निवेश से संबंधित टैक्स ट्रीटमेंट और इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में इसे कैसे दिखाना है, इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
  • यह एक महत्वपूर्ण वीडियो है, इसे अंत तक देखें और नीचे दिए शेयर बटन से इसे अपने दोस्तों के साथ साझा करें।
  • हमारी वेबसाइट taxonline.co.in  पर जाएँ, जहाँ आपको GST, इनकम टैक्स, अकाउंटिंग, और ऑटोमेशन जैसे कोर्सेस मिलेंगे।
  • टैक्स अपडेट्स टैब पर क्लिक करके आप हमारे आर्टिकल्स और दैनिक अपडेट्स देख सकते हैं।

म्यूच्यूल फंड्स के प्रकार

  • म्यूच्यूल फंड्स मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं:
    1. इक्विटी ओरिएंटेड म्यूच्यूल फंड्स (STT लागू)
    2. डेट ओरिएंटेड म्यूच्यूल फंड्स

इक्विटी ओरिएंटेड म्यूच्यूल फंड्स का टैक्स ट्रीटमेंट

  • इक्विटी ओरिएंटेड म्यूच्यूल फंड्स का टैक्स ट्रीटमेंट शेयरों की बिक्री के समान है।
  • होल्डिंग पीरियड:
    • 12 महीने तक: शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG)
    • 12 महीने से अधिक: लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG)
  • टैक्स दरें (23 जुलाई 2025 से लागू):
    • शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन:
      • 23 जुलाई 2025 से पहले: 15%
      • 23 जुलाई 2025 के बाद: 20%
    • लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन:
      • 23 जुलाई 2025 से पहले: 10% (1 लाख तक छूट)
      • 23 जुलाई 2025 के बाद: 12.5% (1.25 लाख तक छूट)
  • सेक्शन: LTCG के लिए सेक्शन 112A, STCG के लिए सेक्शन 111A।
  • टैक्स दरों का विस्तृत विवरण मेरे आर्टिकल में उपलब्ध है, जिसका लिंक पिन कमेंट में दिया जाएगा।

डेट ओरिएंटेड म्यूच्यूल फंड्स का टैक्स ट्रीटमेंट

  • महत्वपूर्ण तारीख: 1 अप्रैल 2023
  • 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदे गए फंड्स:
    • हमेशा शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाएगा।
    • टैक्स: सामान्य स्लैब रेट के अनुसार (आपकी अन्य आय के साथ जोड़ा जाएगा)।
  • 1 अप्रैल 2023 से पहले खरीदे गए फंड्स:
    • शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन: स्लैब रेट के अनुसार।
    • लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन: 20% (इंडेक्सेशन के साथ)।
  • इंडेक्सेशन: लागत को कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) के आधार पर समायोजित किया जाता है। उदाहरण के लिए, FY 2024-25 के लिए CII 363 है।

ITR में म्यूच्यूल फंड्स को कैसे दिखाएँ

  • वेबसाइट: income tax.gov.in पर जाएँ।
  • प्रक्रिया:
    1. ई-फाइल > इनकम टैक्स रिटर्न पर क्लिक करें।
    2. AIS (Annual Information Statement) और Form 26AS चेक करें।
    3. अगर AIS में डेटा अधूरा हो, तो म्यूच्यूल फंड की कैपिटल गेन स्टेटमेंट निकालें।
    4. असेसमेंट ईयर और ऑनलाइन मोड चुनें, फिर कंटिन्यू करें।
  • ITR फॉर्म का चयन:
    • अगर LTCG 1.25 लाख तक है (सेक्शन 112A), तो ITR-1 में दिखा सकते हैं।
    • अगर STCG, डेट फंड्स, या प्रॉपर्टी बिक्री है, तो ITR-2 या ITR-3 चुनें।
    • अगर बिजनेस/प्रोफेशन या इंट्राडे/F&O है, तो ITR-2 या ITR-3 उपयुक्त।
  • शेड्यूल्स:
    • शेड्यूल कैपिटल गेन में जाएँ।
    • शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन:
      • इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स: सेक्शन 111A के तहत, फुल वैल्यू ऑफ कंसिडरेशन, कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन, और खर्चे डालें।
      • डेट ओरिएंटेड फंड्स: “अदर एसेट्स” ऑप्शन में, फुल वैल्यू ऑफ कंसिडरेशन और कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन (बिना इंडेक्सेशन) डालें।
    • लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन:
      • इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स: शेड्यूल 112A में, 31 जनवरी 2018 से पहले/बाद और 23 जुलाई 2025 से पहले/बाद की डिटेल्स डालें।
      • डेट ओरिएंटेड फंड्स: “अदर एसेट्स” में, इंडेक्स्ड कॉस्ट ऑफ एक्विजिशन (CII के आधार पर) डालें।
    • क्वार्टर-वाइज डिटेल्स: अक्रूअल बेसिस पर डिटेल्स डालें, वरना ITR फाइलिंग में एरर आएगा।
  • टैक्स कैलकुलेशन: ITR यूटिलिटी में ऑटोमैटिक होती है।

उदाहरण

  • इक्विटी ओरिएंटेड फंड्स (STCG):
    • बिक्री मूल्य: 1,00,000 रुपये
    • खरीद मूल्य: 20,000 रुपये
    • अन्य खर्चे: 430 रुपये
    • कैपिटल गेन: 1,00,000 - 20,000 - 430 = 79,570 रुपये
    • टैक्स: 20% (23 जुलाई 2025 के बाद)
  • डेट ओरिएंटेड फंड्स (LTCG, 1 अप्रैल 2023 से पहले):
    • बिक्री मूल्य: 1,00,000 रुपये
    • खरीद मूल्य (FY 2022-23, CII 331): 20,000 रुपये
    • इंडेक्स्ड कॉस्ट: (20,000 × 363) ÷ 331 = ~21,933 रुपये
    • कैपिटल गेन: 1,00,000 - 21,933 = 78,067 रुपये
    • टैक्स: 20% (इंडेक्सेशन के साथ)

अतिरिक्त टिप्स

  • AIS और स्टेटमेंट का मिलान: अगर AIS में डेटा कम है, तो अपनी स्टेटमेंट से सही डेटा डालें।
  • TDS और अन्य इनकम: Form 26AS से TDS और अन्य आय की जानकारी शामिल करें।
  • शेड्यूल्स का चयन: अपनी आय के अनुसार सही शेड्यूल चुनें।
  • विस्तृत ITR-2 गाइड: पिन कमेंट में दी गई वीडियो देखें।

हमारी सेवाएँ

  • वेबसाइट: taxonline .co.in
    • कोर्सेस: GST, इनकम टैक्स, अकाउंटिंग, ऑटोमेशन ऑफ बैलेंस शीट, MSME, TDS।
    • लाइफटाइम वैलिडिटी (ब्लैक थंबनेल) और लिमिटेड वैलिडिटी (येलो थंबनेल) के कोर्स उपलब्ध।
    • ऑटोमेशन ऑफ बैलेंस शीट कोर्स में एक्सेल स्किल्स भी शामिल।
  • FAQ टैब: कोर्स जॉइन करने और एक्सेस करने की जानकारी।
  • सोशल मीडिया: Instagram और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर फॉलो करें (लिंक डिस्क्रिप्शन में)।
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समापन

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  • अगर आपकी समस्या हल हो गई, तो कमेंट में बताएँ।
  • ITR-2 की विस्तृत जानकारी के लिए पिन कमेंट में दी गई वीडियो देखें।
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  • धन्यवाद!

 ITR 2: For Whom and Who is Eligible to File It in India?

ITR 2 is an Income Tax Return form designed for specific categories of taxpayers in India, namely individuals and Hindu Undivided Families (HUFs), who have certain types of income and meet particular eligibility criteria.

Who is Eligible to File ITR 2?

To be eligible to file ITR 2, a taxpayer must meet the following criteria:

  1. Type of Taxpayer:
    • Individuals (resident, non-resident, or Resident but Not Ordinarily Resident - RNOR)
    • Hindu Undivided Families (HUFs)
  2. Income Sources: The total income for the assessment year must include one or more of the following:
    • Salary or Pension: Income earned from employment or retirement benefits.
    • House Property: Income from one or more house properties (unlike ITR 1, which restricts taxpayers to a single property).
    • Capital Gains: Both short-term and long-term gains from the sale of assets like property, securities, or investments.
    • Other Sources: Income from sources such as winnings from lotteries, horse racing, gambling, etc.
    • Agricultural Income: Income from agriculture exceeding ₹5,000 (ITR 1 has a lower threshold for agricultural income).
  3. Special Circumstances:
    • Foreign Assets or Income: Residents holding assets (including financial interests) or earning income outside India, or having signing authority in any foreign account.
    • Directors in a Company: Individuals serving as directors in any company (public or private).
    • Unlisted Equity Shares: Individuals who have invested in unlisted equity shares during the financial year.
  4. No Business or Professional Income:
    • ITR 2 is not applicable to taxpayers with income from profits and gains of business or profession, including income from a partnership firm (e.g., salary, interest, bonus, commission, or remuneration received as a partner). Such taxpayers must file ITR 3 or ITR 4 instead.
  5. Non-Eligibility for ITR 1:
    • Taxpayers who cannot use ITR 1 due to having income or conditions beyond its scope (e.g., multiple properties, capital gains, foreign assets, or total income exceeding ₹50 lakhs from sources not allowed in ITR 1) must use ITR 2.

Key Conditions and Exclusions

  • Residency Status: ITR 2 can be filed by residents, non-residents, or RNORs, provided their income matches the specified categories and they have no business income.
  • Comparison with ITR 1: If a taxpayer qualifies for ITR 1 (e.g., total income up to ₹50 lakhs from salary, one house property, and other sources with agricultural income up to ₹5,000), they should file ITR 1 instead. ITR 2 is for those whose income or circumstances exceed ITR 1’s limits.
  • Exclusion of Business Income: If an individual or HUF has income from a proprietary business, profession, or partnership firm, they are ineligible for ITR 2 and must use ITR 3 (for business/profession) or ITR 4 (for presumptive business income).

Examples of Eligible Taxpayers

  • A salaried individual with income from two house properties and capital gains from selling shares.
  • A resident with a foreign bank account or income from overseas investments.
  • A non-resident earning rental income from a property in India.
  • An HUF with income from multiple properties and agricultural income above ₹5,000.
  • A company director with salary income and dividends from unlisted equity shares.

Summary

ITR 2 is designed for individuals and HUFs in India who:

  • Do not earn income from business or profession.
  • Have income from salary, multiple house properties, capital gains, foreign assets/income, agricultural income exceeding ₹5,000, or other sources like lottery winnings.
  • Are directors in a company, hold unlisted equity shares, or are non-residents with eligible Indian income.

This form ensures that taxpayers with more complex financial profiles, beyond the scope of ITR 1 but excluding business income, can accurately report their income and comply with tax regulatory

 

आयकर रिटर्न (ITR-2) के लिए नया स्क्रिप्ट - हिंदी में

हैलो दोस्तों, स्वागत है हमारे चैनल पर!
आज हम बात करेंगे आयकर रिटर्न फॉर्म ITR-2 में हुए नए बदलावों के बारे में, जो केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने असेसमेंट ईयर 2026 के लिए अधिसूचित किए हैं। ये बदलाव 1 अप्रैल 2025 से लागू होंगे। तो चलिए, इन बदलावों को आसान भाषा में समझते हैं!


1. ऑनलाइन फाइलिंग और प्री-फिल्ड डेटा की सुविधा

आयकर विभाग ने ITR-2 की ऑनलाइन फाइलिंग को और आसान बना दिया है। अब आप ई-फाइलिंग पोर्टल पर प्री-फिल्ड डेटा के साथ ITR-2 फाइल कर सकते हैं। साथ ही, 11 जुलाई को ITR-2 के लिए एक्सेल यूटिलिटी भी जारी की गई है, जिससे आप आसानी से रिटर्न तैयार और फाइल कर सकते हैं। ये बदलाव करदाताओं के लिए टैक्स अनुपालन को और सरल और कुशल बनाते हैं।


2. शेयर बायबैक पर पूंजीगत नुकसान की रिपोर्टिंग

कंपनी द्वारा अपने शेयरों के बायबैक के लिए शेयरधारकों को किए गए भुगतान से होने वाले पूंजीगत नुकसान को अब शेड्यूल CG में एक नए कॉलम में दर्ज किया जा सकता है। यह प्रावधान कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 68 के तहत लागू है। लेकिन ध्यान दें, इस नुकसान की अनुमति तभी होगी, जब संबंधित डिविडेंड आय को ‘अन्य स्रोतों से आय’ के तहत घोषित किया जाए।


3. डिविडेंड आय की नई रिपोर्टिंग

ITR-2 में अब एक नया कॉलम जोड़ा गया है, जो धारा 2(22)(f) के तहत शेयर बायबैक से प्राप्त डिविडेंड आय को विशेष रूप से दर्ज करने के लिए है। यह सुनिश्चित करता है कि आपकी डिविडेंड आय सही तरीके से रिकॉर्ड हो।


4. रियल एस्टेट लेनदेन में लागत का बंटवारा

अब रेजिडेंट व्यक्तियों को ITR-2 में जमीन और भवन के हस्तांतरण के लिए अधिग्रहण लागत (cost of acquisition) और सुधार लागत (cost of improvement) को अलग-अलग बताना होगा। यह नियम 23 जुलाई 2024 को या उसके बाद किए गए लेनदेन के लिए लागू है। इससे इंडेक्सेशन लाभों का उपयोग आसान होगा।


5. संपत्ति और दायित्वों की रिपोर्टिंग में नया थ्रेशोल्ड

अब जिन करदाताओं की कुल आय 1 करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें वित्तीय वर्ष के अंतिम दिन तक की सभी संपत्तियों और दायित्वों की जानकारी देनी होगी। पहले यह सीमा 50 लाख रुपये थी। यह बदलाव पारदर्शिता को बढ़ाता है।


6. पूंजीगत लाभ की तारीख के आधार पर अलग-अलग कॉलम

फाइनेंस एक्ट 2024 के तहत 23 जुलाई 2024 से पूंजीगत लाभ की कर दरों में बदलाव किए गए हैं। इसके लिए ITR-2 में नए कॉलम जोड़े गए हैं, जो 23 जुलाई 2024 से पहले और बाद के पूंजीगत लाभ को अलग-अलग दर्ज करने में मदद करेंगे। इससे पुरानी और नई कर दरों के आधार पर सही गणना सुनिश्चित होगी।


7. टीडीएस शेड्यूल में नया कॉलम

ITR-2 के टीडीएस शेड्यूल में एक नया कॉलम जोड़ा गया है, जिसमें करदाता को यह बताना होगा कि स्रोत पर काटा गया कर (TDS) किस धारा के तहत काटा गया है। यह सटीकता और अनुपालन को बढ़ाता है।


ITR-3 के बारे में भी जानें

ITR-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) के लिए है, जिनकी आय व्यवसाय या पेशे के लाभ और आय से आती है। इसमें भी पूंजीगत लाभ, कटौती, और संपत्ति-दायित्वों की नई थ्रेशोल्ड रिपोर्टिंग जैसे महत्वपूर्ण बदलाव शामिल किए गए हैं।


अंत में...
ये नए बदलाव करदाताओं के लिए टैक्स फाइलिंग को और पारदर्शी, आसान और कुशल बनाने के 

प्रॉपर्टी की बिक्री पर इनकम टैक्स की गणना करने के लिए, हमें कैपिटल गेन्स टैक्स के नियमों को ध्यान में रखना होगा, जो इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के तहत लागू होते हैं। टैक्स की देनदारी कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे कि प्रॉपर्टी को कितने समय तक रखा गया, आपका रेजिडेंशियल स्टेटस, खर्चे, और छूट के दावे। नीचे हिंदी में स्टेप-बाय-स्टेप व्याख्या दी गई है, जो जुलाई 2025 तक के नवीनतम टैक्स नियमों पर आधारित है।


1. कैपिटल गेन्स टैक्स के प्रकार

प्रॉपर्टी की बिक्री से होने वाला मुनाफा कैपिटल गेन के रूप में टैक्सेबल होता है। यह दो प्रकार का होता है:

  • शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG): यदि प्रॉपर्टी को 24 महीने (2 साल) से कम समय तक रखा गया है, तो मुनाफा शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है।
  • लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG): यदि प्रॉपर्टी को 24 महीने से अधिक समय तक रखा गया है, तो मुनाफा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन होता है। इस पर 12.5% टैक्स (बिना इंडेक्सेशन) या 20% टैक्स (इंडेक्सेशन के साथ, यदि प्रॉपर्टी 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई हो) लगता है।

2. कैपिटल गेन की गणना

कैपिटल गेन निकालने के लिए निम्नलिखित फॉर्मूला उपयोग होता है:

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन (STCG):


STCG = बिक्री मूल्य - (खरीद मूल्य + सुधार लागत + ट्रांसफर खर्चे)


लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन (LTCG) (यदि इंडेक्सेशन लागू होता है):

LTCG = बिक्री मूल्य - (इंडेक्स्ड खरीद लागत + इंडेक्स्ड सुधार लागत + ट्रांसफर खर्चे)

इंडेक्स्ड लागत निकालने के लिए कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स (CII) का उपयोग होता है, जो महंगाई को समायोजित करता है। लेकिन, 23 जुलाई 2024 के बाद के लेनदेन के लिए इंडेक्सेशन बेनिफिट हटा दिया गया है, और LTCG पर 12.5% टैक्स लगता है।

3. ₹26 लाख की प्रॉपर्टी के मामले में

आपने बताया कि प्रॉपर्टी की बिक्री मूल्य ₹26 लाख है, लेकिन टैक्स गणना के लिए निम्नलिखित जानकारी चाहिए:

  • प्रॉपर्टी कब खरीदी थी (होल्डिंग पीरियड निकालने के लिए)?
  • खरीद मूल्य (लागत)?
  • सुधारburgoपन लागत (रेनोवेशन आदि)?
  • ट्रांसफर खर्चे (ब्रोकरेज, लीगल फीस आदि)?
  • आपका रेजिडेंशियल स्टेटस (रेजिडेंट या NRI)?
  • क्या आप छूट का दावा करना चाहते हैं (सेक्शन 54, 54EC, या 54F के तहत)?

उदाहरण गणना

मान लीजिए:

  • प्रॉपर्टी 3 साल पहले (2022 में) ₹20 लाख में खरीदी गई थी।
  • कोई सुधार लागत नहीं है।
  • ट्रांसफर खर्चे (ब्रोकरेज आदि) ₹50,000 हैं।
  • आप रेजिडेंट इंडियन हैं।

चरण 1: होल्डिंग पीरियड 3 साल (>24 महीने) होने के कारण, यह LTCG होगा।

चरण 2: कैपिटल गेन गणना (बिना इंडेक्सेशन, 23 जुलाई 2024 के बाद)

text
बिक्री मूल्य = ₹26,00,000
खरीद मूल्य = ₹20,00,000
ट्रांसफर खर्चे = ₹50,000
LTCG = बिक्री मूल्य - (खरीद मूल्य + ट्रांसफर खर्चे)
= ₹26,00,000 - (₹20,00,000 + ₹50,000)
= ₹5,50,000

चरण 3: टैक्स गणना

  • LTCG पर टैक्स दर: 12.5% (बिना इंडेक्सेशन)
  • टैक्स = ₹5,50,000 × 12.5% = ₹68,750
  • सेस (4% हेल्थ और एजुकेशन सेस): ₹68,750 × 4% = ₹2,750
  • कुल टैक्स: ₹68,750 + ₹2,750 = ₹71,500

यदि प्रॉपर्टी 23 जुलाई 2024 से पहले खरीदी गई थी, तो आप इंडेक्सेशन बेनिफिट ले सकते हैं, और टैक्स 20% (प्लस सेस) पर गणना होगा। इसके लिए CII चार्ट का उपयोग होता है।

यदि शॉर्ट-टर्म है (2 साल से कम): यदि प्रॉपर्टी 24 महीने से कम समय तक रखी गई, तो STCG आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्सेबल होगा। मान लीजिए आप 30% टैक्स स्लैब में हैं:

STCG = ₹5,50,000
टैक्स (30% स्लैब) = ₹5,50,000 × 30% = ₹1,65,000
सेस (4%) = ₹1,65,000 × 4% = ₹6,600
कुल टैक्स = ₹1,65,000 + ₹6,600 = ₹1,71,600

4. टीडीएस (टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स)

  • यदि प्रॉपर्टी की कीमत ₹50 लाख से कम है (जैसे कि ₹26 लाख), तो खरीदार को टीडीएस काटने की जरूरत नहीं है।
  • यदि आप NRI हैं, तो टीडीएस 20% (LTCG के लिए) या 30% (STCG के लिए) हो सकता है, लेकिन इस मामले में कीमत ₹50 लाख से कम है, इसलिए टीडीएस लागू नहीं होगा।

5. टैक्स बचाने के लिए छूट

आप कैपिटल गेन्स टैक्स को कम करने के लिए निम्नलिखित छूट का दावा कर सकते हैं:

  • सेक्शन 54: यदि आप LTCG को एक नई रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी में रीइनवेस्ट करते हैं (1 साल पहले या 2 साल बाद के अंदर, या निर्माण के लिए 3 साल), तो छूट मिल सकती है।
  • सेक्शन 54EC: यदि आप LTCG को NHAI या REC बॉन्ड्स में (अधिकतम ₹50 लाख) 6 महीने के अंदर निवेश करते हैं, तो टैक्स छूट मिल सकती है।
  • कैपिटल गेन्स अकाउंट स्कीम (CGAS): यदि आप ITR फाइलिंग से पहले रीइनवेस्ट नहीं कर पाते, तो CGAS में जमा करके छूट का दावा कर सकते हैं।

6. अतिरिक्त नोट्स

  • दस्तावेज: सेल डीड, खरीद समझौता, और सुधार खर्चों के सबूत रखें, क्योंकि ये ITR फाइलिंग और छूट के दावे के लिए जरूरी हैं।
  • फॉर्म 26AS: जांच लें कि टीडीएस (यदि काटा गया हो) फॉर्म 26AS में दिख रहा है।
  • एडवांस टैक्स: यदि कैपिटल गेन ₹1 लाख से अधिक है, तो एडवांस टैक्स का भुगतान जरूरी हो सकता है।

अंतिम जवाब

₹26 लाख की प्रॉपर्टी की बिक्री पर टैक्स ₹71,500 (LTCG के लिए, बिना इंडेक्सेशन) या ₹1,71,600 (STCG के लिए, 30% स्लैब पर) तक हो सकता है, जो होल्डिंग पीरियड और आपके टैक्स स्लैब पर निर्भर करता है। सटीक गणना के लिए खरीद मूल्य, होल्डिंग पीरियड, और खर्चों की जानकारी दीजिए। छूट (सेक्शन 54, 54EC) का उपयोग करके टैक्स बचाया जा सकता है।

यदि आप और जानकारी दे सकते हैं (जैसे खरीद मूल्य, तारीख आदि), तो मैं और सटीक गणना दे सकता हूँ!

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