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“कैश विदड्रॉल टैक्स क्या है?”


सोचिए… आप अपने ही बैंक अकाउंट से अपना ही पैसा निकालने बैंक जाते हैं।
लेकिन बैंक कहता है — “इस पर टैक्स कटेगा!”
अब आप सोच रहे होंगे — टैक्स तो इनकम पर लगता है, फिर अपने पैसे निकालने पर टैक्स क्यों?
और अगर आप सोच रहे हैं कि दिक्कत सिर्फ कैश निकालने में है… तो ज़रा ठहरिए!
बैंक में कैश जमा करने पर तो इससे भी बड़ी मुसीबत हो सकती है।

चलिए, मैं आपको एक रियल स्टोरी बताता हूं जो सब कुछ साफ कर देगी 👇
🎥 [सीन ट्रांजिशन: “रियल स्टोरी – मिस्टर Suneel का केस”]
मिलिए मिस्टर Suneel  से — UP के एक किसान।
इनकी आमदनी ज़्यादातर खेती-बाड़ी से होती थी।
एक दिन उन्होंने अपनी कुछ ज़मीन बेची और करीब ₹2 करोड़ रुपये कैश में मिले।
उन्होंने वो पूरा कैश अपने बैंक अकाउंट में जमा कर दिया।
अब हुआ क्या?
बैंक ने इस बड़ी डिपॉजिट की जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को दे दी — जो कि बैंक की कानूनी जिम्मेदारी है।
लेकिन ट्विस्ट ये था —
मिस्टर मनु ने कभी अपनी ITR फाइल नहीं की थी,
और उन्हें ये तक नहीं पता था कि टैक्स डिपार्टमेंट की तरफ से उनके नाम पर नोटिस आया हुआ है।
जब बार-बार नोटिस का जवाब नहीं मिला, तो डिपार्टमेंट ने मान लिया कि ये ₹2 करोड़ ब्लैक मनी है।
नतीजा?
भारी टैक्स और पेनल्टी लगा दी गई, और उनका बैंक अकाउंट फ्रीज़ कर दिया गया।
💡 सीख ये है:
अगर आप कोई बड़ा कैश डिपॉजिट करते हैं, तो उसका सोर्स ज़रूर जस्टिफाई करना चाहिए।
वरना इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपको भारी पेनल्टी दे सकता है।


🎥 [सीन ट्रांजिशन: “कैश विदड्रॉल पर टैक्स क्यों कटता है?”]
अब बात करते हैं उस नियम की जिसकी वजह से बैंक आपके पैसे निकालते वक्त टैक्स काटता है।
पुराने इनकम टैक्स कानून में ये सेक्शन 194N के तहत आता था।
लेकिन नए इनकम टैक्स एक्ट 2025 में ये सेक्शन 393 के अंदर कवर किया गया है।
देखिए कैसे काम करता है 👇
अगर आपने अपनी ITR फाइल की हुई है,
और आप एक फाइनेंशियल ईयर में ₹1 करोड़ से ज़्यादा कैश निकालते हैं,
तो बैंक 2% TDS काटेगा।
लेकिन अगर आपने पिछले 3 सालों में ITR फाइल नहीं की है,
और आप ₹20 लाख से ज़्यादा कैश निकालते हैं,
तो उस पर 2% TDS कटेगा।
और अगर ₹1 करोड़ से ज़्यादा निकालते हैं,
तो 5% TDS काटा जाएगा।
अब डरिए मत!
ये TDS कोई एक्स्ट्रा टैक्स नहीं है।
ये एक तरह का एडवांस टैक्स है, जिसे आप अगले साल अपनी ITR फाइल करते वक्त क्लेम कर सकते हैं


🎥 [सीन ट्रांजिशन: “कैश डिपॉजिट और विदड्रॉल लिमिट्स”]
अब बात करते हैं उन लिमिट्स की जो आपको ज़रूर ध्यान रखनी चाहिए 👇
सेविंग अकाउंट में एक फाइनेंशियल ईयर में कैश डिपॉजिट या विदड्रॉल की लिमिट लगभग ₹10 लाख है।
वहीं करंट अकाउंट में ये लिमिट ₹50 लाख होती है।
अगर आप इन लिमिट्स को क्रॉस करते हैं, तो बैंक उस जानकारी को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को भेजता है।
ये ट्रांजैक्शन आपके AIS (Annual Information Statement) में High Value या Significant Financial Transactions के रूप में दिखते हैं।
हाल ही में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने एक स्पेशल कैंपेन भी चलाया है,
जहां टैक्सपेयर को ये जानकारी दी जा रही है कि उनके नाम पर हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन रिपोर्ट हुई हैं।
तो अगर आप भी बैंक में बार-बार कैश जमा या निकालते हैं,
तो इन लिमिट्स का ध्यान रखिए — या फिर अपनी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री हमेशा क्लियर रखिए।


🎥 [सीन ट्रांजिशन: “स्मार्ट टैक्स प्लानिंग टिप्स”]
अब बात करते हैं कुछ लीगल और स्मार्ट टैक्स प्लानिंग की।
मान लीजिए आपको ₹10 लाख कैश विदड्रॉ करना है।
अगर आप ये पूरा अमाउंट एक ही अकाउंट से निकालेंगे तो रिपोर्टिंग का रिस्क बढ़ जाएगा।
लेकिन अगर आपके पास दो बैंक अकाउंट हैं,
तो ₹5 लाख-₹5 लाख करके दो अकाउंट्स से निकालिए —
इससे कोई भी बैंक अकाउंट रिपोर्ट नहीं करेगा।
सीधा, लीगल और समझदारी भरा तरीका!
🎥 [आउट्रो – पॉजिटिव टोन]
तो दोस्तों, अब आप जान गए होंगे कि
कैश को स्मार्टली हैंडल करना कितना ज़रूरी है।
हर डिपॉजिट का सोर्स क्लियर रखें, लिमिट्स फॉलो करें और टैक्स प्लानिंग समझदारी से करें।
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अगर आपका कोई सवाल या डाउट है,
तो नीचे कमेंट सेक्शन में ज़रूर बताइए।
FRIENDS ...
मिलते हैं अगले वीडियो में —
तब तक मुस्कुराइए, समझदारी से कमाइए और टैक्स सेफ रहिए! 😊

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